स्वस्थ,आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लिए आयुर्वेद - डॉ जी एस तोमर
•📅 6 सितंबर 2026 | सुबह 11:45 बजे
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ग्वालियर।आरोग्य भारती एवं निजी कंपनी के संयुक्त तत्वावधान में आज एक निजी प्रतिष्ठान में आयोजित “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय पर एक वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया गया ।जिसमें ग्वालियर एवं आसपास से ख्याति लब्ध आयुर्वेद चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया । इस अवसर पर आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.(डॉ.) जी एस तोमर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान परम्परा की जीवंत एवं अमूल्य धरोहर बताया । उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्राथमिक प्रयोजन स्वास्थ्य संरक्षण एवं संवर्धन है । इसमें वर्णित जीवनशैली आज वैश्विक क्षितिज पर आकर्षण का केंद्र बन गई है ।
आहार, निद्रा एवं ब्रह्मचर्य इसमें तीन उपस्तंभ बताए गये हैं । क्या, कब, कितना, कैसे और किस तरह खाएँ यह आयुर्वेद में अत्यंत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बताया गया है । वहीं इसमें बताई गई दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या, सदवृत्त, आचार रसायन एवं धारणीय / अधारणीय वेग स्वास्थ्य संरक्षण की संजीवनी है । डॉ तोमर ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदीय औषधियाँ प्रभावी एवं निरापद हैं । वैज्ञानिक शोध इसे प्रमाणित कर चुके हैं । इस क्षेत्र में डाबर का महत्वपूर्ण योगदान है । स्वर्ण गुग्गुल, बसन्तकुसुमाकर रस, बृहत वातचिंतामणि रस की प्रभावशीलता पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने इनको जीर्ण एवं असाध्य रोगों के लिए संजीवनी बताया ।
सी आर आई के वरिष्ठ शोध अधिकारी डॉ अनिल मंगल ने शासन की विविध योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की । इस कार्यक्रम में आगामी 23 सितम्बर को वैश्विक स्तर पर मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस के थीम पर विस्तृत चर्चा की गई । इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉ के एल मिश्रा, डॉ महेश शर्मा, डॉ लाल सिंह जादौन, डॉ परमाल सिंह तोमर, डॉ राजेन्द्र सिंह तोमर, डॉ अनिल गुप्ता, डॉ उमा मंगल, डॉ पूजा पाराशर, डॉ साधना गुप्ता, डॉ रूपेश, विनोद उपाध्याय, श्री केपीएस चौहान एवं श्री अमर सिंह सिकरवार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।
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