WhatsApp

पंचगव्य केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण है

•📅 31 अक्टूबर 2026 | सुबह 9:45 बजे
⏱️ 3 मिनट पठन👁 32 व्यूज
पंचगव्य केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण है
🟢 WhatsApp

लखनऊ। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, तुलसी दास मार्ग, में पंचगव्य विषय पर संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया
महर्षि चरक सभागार में _पंचगव्य (गोदुग्ध, दही, घृत, गोमूत्र, गोमय) तथा आयुर्वेद की मानव-स्वास्थ्य में भूमिका एवं उपयोगिता_ विषय पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ: दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या एवं अधीक्षिका तथा शल्यतंत्र विभाग की विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ शल्य चिकित्सक *प्रो. सुधा सिंह ने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
*मुख्य अतिथि: राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष विभाग, उत्तर प्रदेश *डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ सुनील मानसिंहका जी* (राष्ट्रीय संयोजक, राजस्थान गौ सेवा परिषद्) - उन्होंने कहा कि पंचगव्य केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। इसके द्वारा किडनी रोग, कैंसर जैसे क्रॉनिक डिसऑर्डर का सफल उपचार किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रोफेसरों व छात्रों से इसे डेली प्रैक्टिस में शामिल करने की अपील की।
श्याम बिहारी गुप्ता जी(अध्यक्ष, गौ सेवा आयोग, - उन्होंने गौ सेवा में अपने 30 वर्षों के योगदान पर चर्चा की।

- *श्री रंजन कुमार जी* (प्रमुख सचिव, आयुष) - पंचगव्य का वैज्ञानिक ट्रायल होना चाहिए।
- जी.एस. प्रियदर्शी जी(महानिदेशक, आयुष) - विभागीय योजनाओं व रिसर्च को बढ़ाने पर जोर दिया।
- *श्री मदन सिंह गर्ब्याल जी* (विशेष सचिव, आयुष)
कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. नारायण दास जी(निदेशक,
*वैज्ञानिक सत्र में:*
*डॉ. मनीष कुमार सिंह* (महाराणा प्रताप आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, कानपुर) ने वैज्ञानिक प्रेजेंटेशन एवं स्लाइड्स के माध्यम से पंचगव्य चिकित्सा के वैज्ञानिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर कर्नाटक से पधारे *डॉ. श्रीकांत जी, एवं डॉ. अनुपम जी ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया।
. आलोक कुमार मिश्रा जी* ने बताया कि आगामी 2 मार्च को महाराणा प्रताप आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, कानपुर में भी पंचगव्य पर एक वृहद संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
*समापन उद्बोधन में मंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं पंचगव्य के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद वैद्य पंचगव्य चिकित्सा के साइंटिफिक अप्रोच को अपनाकर इसकी प्रैक्टिस करें। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आयुष के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों एवं योजनाओं के बारे में बताया तथा आयुर्वेद छात्रों को शोधपरक बनने के लिए प्रेरित किया और आश्वस्त किया कि जिस तरह की मदद की आवश्यकता होगी, वह सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।

🏷️ संबंधित टैग्स:#ताजा_खबर#लखनऊ
🟢 WhatsApp

📖 यह भी पढ़ें